July 26, 2017

Navigation

Navigation

Comments

  1. Dear Shivnath jha ji,
    good night to all your family. aap gariboan koa bahut madad krtiy hia.

    • “All civilized societies are judged by how they honour those that gave their lives so that the rest of us could be free. No body, especially the present generation can imagine the hardships, the torture and the ultimate sacrifices our freedom fighters have paid. If we can transmit to the new generation of Indians, at least a little bit of their patriotism, their flaming nationalism, their courage, their capacity for sacrifice, then we would have done something significant today……….”

      आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

  2. good think sir me bhi ek book store chla rha hun aapki book ki bhut dimand h,,, market me kyonki aapne ek acchi book write ki h,,, jo 100%sach h,,,, thank you ….JaiHind….

    • “All civilized societies are judged by how they honour those that gave their lives so that the rest of us could be free. No body, especially the present generation can imagine the hardships, the torture and the ultimate sacrifices our freedom fighters have paid. If we can transmit to the new generation of Indians, at least a little bit of their patriotism, their flaming nationalism, their courage, their capacity for sacrifice, then we would have done something significant today……….”

      आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

    • “All civilized societies are judged by how they honour those that gave their lives so that the rest of us could be free. No body, especially the present generation can imagine the hardships, the torture and the ultimate sacrifices our freedom fighters have paid. If we can transmit to the new generation of Indians, at least a little bit of their patriotism, their flaming nationalism, their courage, their capacity for sacrifice, then we would have done something significant today……….”

      आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

  3. It is a great work by Sri Jha.My salutatations to him. May the Almighty bless him with prosperity in his endeavours. I wish similar efforts be made to bring to light personalities from south like Katta Bomman etc.

    • “All civilized societies are judged by how they honour those that gave their lives so that the rest of us could be free. No body, especially the present generation can imagine the hardships, the torture and the ultimate sacrifices our freedom fighters have paid. If we can transmit to the new generation of Indians, at least a little bit of their patriotism, their flaming nationalism, their courage, their capacity for sacrifice, then we would have done something significant today……….”

      आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

  4. Dear today I was watching zee tv program and came to know about you that you are working for such a nobel cause… I am working with a pvt. Bank and I also want to do some thigs what I can do for our real Heros….

    • “All civilized societies are judged by how they honour those that gave their lives so that the rest of us could be free. No body, especially the present generation can imagine the hardships, the torture and the ultimate sacrifices our freedom fighters have paid. If we can transmit to the new generation of Indians, at least a little bit of their patriotism, their flaming nationalism, their courage, their capacity for sacrifice, then we would have done something significant today……….”

      आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

    • आन्दोलन: एक पुस्तक से, एक प्रयास है, भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन १८५७-१९४७ के गुमनाम क्रान्तिकारियों, शहीदों और इसी देश के समाज द्वारा उपेक्षित गुमनामी जीवन जी रहे उनके वंशजों का। यदि हमारा प्रयास यदि आपके नजर में अहमियत रखता हो, आपको ऐसा लगे की प्रयास “उचित” है, तो अपने आर्थिक सामर्थ के अनुसार मदद जरूर करें – आपके मदद के लिए हम या हमारा प्रयास कुछ दे नहीं सकता, परन्तु परन्तु इस प्रयास के तहत प्रकाशित होने वाली सभी पुस्तकों के अन्त में, इस प्रयास के सहायक के रूप में आपका नाम उद्धृत रहेगा – याचना तो कर ही सकता हूँ, आप “तिरस्कृत” भी करने का उतना ही अधिकार रखते हैं। शेष ईश्वर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Submit a Comment